संपादकीय

काबिलियत और बड़प्पन जिम्मेदारियों की भट्टी में तपकर ही हासिल होते हैं
संपादकीय@हरेश पंवार -9 सितंबर 2026
सुविधाएं इंसान को आराम दे सकती हैं,...

भविष्य की चिंता में वर्तमान का गला न घोंटें
संपादकीय@7 सितंबर 2026
एक व्यक्ति जीवनभर धन कमाने में लगा रहा।...

तेरा-मेरा की संकीर्ण सोच से बिखरते परिवा
संपादकीय@8 सितंबर 2026
मनुष्य ने विज्ञान, तकनीक और भौतिक सुविधाओं के ...

दुर्व्यसन से आच्छादित लोकतंत्र
संपादकीय@हरेश पंवार _6 सितंबर 2026
लोकतंत्र को हम बचपन से एक सरल वाक्य म...

परिश्रम, आत्मचिंतन, मौन और सावधानी—सफल जीवन के चार मार्गदर्शक
संपादकीय@5 सितंबर 2026
एक बार एक बुजुर्ग व्यक्ति ने अपने जीवन के अनुभवों ...

आदर्शहीन जीवन: घटनाओं की भीड़ या सार्थक यात्रा?
संपादकीय@ हरेश पंवार _4 नवंबर 2026
एक बार एक बुजुर्ग शिक्षक से उनके शिष्य...

*बचपन की उंगली से बुढ़ापे के सहारे तक—यही है रिश्तों की असली परीक्षा*
संपादकीय@हरेश पंवार_ 2 सितंबर 2026
एक वृद्ध पिता बरामदे में रोज शाम को कु...


लोकतंत्र का पर्व मनाइए, रिश्तो में राजनीति का जहर मत घोलिए
संपादकीय @हरेश कुमार 27 अगस्त 2026
एक मोहल्ले में चुनाव का मौसम आया। गलिय...

इंसान के मन का जहर, समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा
संपादकीय@हरेश पंवार -26 अगस्त 2026
साँप के फन में भरा जहर शरीर को नुकसान ...

शुद्धता मन की हो, इंसान की नहीं
संपादकीय@ हरेश पंवार -25 अगस्त 2026
एक छोटे से गांव में एक कुआं था। गांव ...

खुशी बाहर नहीं, भीतर की रोशनी है
संपादकीय@हरेश पंवार
एक व्यक्ति सुबह घर से निकला। उसके पास अच्छा मका...

80 वर्ष की आजादी : तिरंगे के नीचे खड़े होकर खुद से पूछने का समय
संपादकीय@Haresh Panwar

रिश्तों में प्रेम जरूरी है, लेकिन अति हर प्रेम को बोझ बना देती है
संपादकीय@Haresh Panwar

ज्ञान, विचार और आचरण: मनुष्य के चरित्र के तीन अमूल्य रत्न
संपादकीय@Haresh Panwar
एक बार एक राजा ने अपने दरबार में घोषणा ...

राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने मनाई खुशी, लड्डू बांटकर किया स्वागत
भीम प्रज्ञा न्यूज.बुहाना।
भारतीय जनता पार्टी द्वार...

जन समस्याओं की आवाज बनेंगे रामराज गुर्जर, जिला जन अभियोग एवं सतर्कता समिति में मिली जिम्मेदारी
राज्य सरकार की समिति में सामाजिक कार्यकर्ता वर्ग से मनोनयन...

पेपर लीक का जहर और शिक्षा व्यवस्था का गिरता विश्वास
भीम प्रज्ञा @संपादकीय
भारत में शिक्षा को हमेशा राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत नींव माना गया...

“कागज़ों में उलझा किसान: जब नियम बोझ बन जाएं”
भीम प्रज्ञा संपादकीय
खेत में खड़ा किसान जब बीज बोता है, तो वह केवल अनाज नहीं, बल्कि अपने स...


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